कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में एक निश्चित उद्देश्य की पूर्ति हेतु जब 10 से 20 कृषक संगठित होकर कार्य करते हैं, और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करते हैं, उक्त संगठन को कृषक हितार्थ समूह ( Farmer’s Intrest Group ) कहते है।
समूह गठन का उद्येष्य -
  • अकेले की अपेक्षा एक समूह में चलना बेहतर होता है।
  • समूह की शक्ति सभी सदस्यों को मिलती है।
  • एक दूसरे से सहयोग की भावना बढ़ती है।
  • समूह में निर्णय लेना खासकर महिलाओं के लिए आसान होता है।
  • संगठन में रहकर परिवार एवं समुदाय में निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।
  • नेतृत्व की क्षमता का विकास होता है।
  • बचत की आदत/छोटे बचत से एक बड़े कोष का निर्माण हो जाता है।
  • समूह द्वारा आकस्मिक ऋण प्राप्त करने में आसानी होती है।
  • शादी, रोजगार, बिमारी हेतु महाजन के कर्ज से मुक्ति मिलती है।
  • साझादारी से सरकार तथा अन्य संस्थानों पर बेहतर प्रभाव पडता है।
  • सरकारी कार्यक्रमों में साझा पहल से मिलने में आसानी होती है।
  • ऋण, बीमा इत्यादि सुविधाएॅ आसानी से प्राप्त हो सकती है
कौन व्यक्ति समूह के सदस्य हो सकते हैं ?
  • कृषक हितार्थी समूह के सभी सदस्य किसान होने चाहिए।
  • गांव की विवाहित महिलाऐं समूह के बेहतर सदस्य होती हंै।
  • सदस्यों की सोच, स्थान, एक तरह की जीवन स्तर तथा एक ही तरह की समस्याऐं हो तो वह समूह बेहतर होता है।
  • वैसे लोग जो 18 वर्ष से अधिक उम्र के हों।
  • वैसे व्यक्ति जो समूह के नियमों का पालन करे तथा समूह के सभी गतिविधियों में भाग लें।
कौन व्यक्ति समूह के सदस्य नहीं हो सकते हैं ?
  • एक कृषक हितार्थी समूह में एक परिवार के एक से अधिक सदस्य नहीं हो सकते है।
  • वैसे कृषक जिन्हों ने बैंक या अन्य समूह का उधार नहीं चुकाया हो।
  • वैसे कृषक जो अन्य कृषक हितार्थी समूह के सदस्य हों।
  • वैसे कृषक जो नौकरी कर रहे हैं।
  • वैसे कृषक जो हमेशा लड़ते-झगड़ते रहते हैं।
  • वैसे कृषक जो किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्य हैं।
  • वैसे कृषक जो मानसिक रूप से विक्षिप्त/पागल हैं।
समूह का नेता (अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष) चुनने वक्त बरती जाने वाली कुछ सावधानीया
  • वैसे कृषक का चयन करना चाहिए जो साहसी, समर्पित, ईमानदार व भेदभाव रहित हों।
  • वैसे कृषक का चयन करना चाहिए जो भविष्य देखकर कार्य करते हांे।
  • वैसे कृषक जो समूह के लाभ को ज्यादा महत्व देते हों।
  • वैसे कृषक जो सभी को बैठक में अपने प्रस्ताव को रखने हेतु उत्साहित करते हांे।
  • वैसे कृषक का चयन करना चाहिए जो हिसाब किताब साफ सुथरा रखते हों।
  • वैसे कृषक जो समूह के नेता के रूप में अपने उत्तरदायित्व को जानते हों।
  • वैसे कृषक जो समूह के विवाद को सुझलाने की क्षमता रखते हों।
  • वैसे कृषक जो सभी सदस्यों को समान रूप से समझते हों तथा सभी को समान अवसर प्रदान करे।
  • वैसे कृषक जिनके पास आत्मविश्वास एवं धैर्य हो।
  • वैसे कृषक का चयन करना चाहिए जिन्हें समूह के बारे में जानकारी हो तथा जो अनुशासित हांे।

ध्यान रखें :- आत्मा, सीतामढ़ी, कृषकों को स्वषक्ति से जीने का रास्ता दिखाने तथा उन्हें आत्म निर्भर बनाने के उद्येष्य से कृषक हितार्थ समूह का गठन करती है। कृपया मुफ्त में कुछ मिलने की आषा से कृषक हितार्थ समूह से न जुडें़।


 
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